rangreza...
मस्ती मुझे कुबूल जो तेरी नजर में है...
19 November 2011
आंसू
गर सलीका हो भीगी हुई आंखों को पढऩे का
तो बहते हुए आंसू भी अक्सर बात किया करते हैं...
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