rangreza...
मस्ती मुझे कुबूल जो तेरी नजर में है...
27 December 2011
रोना
फकत दो चार बार का रोना हो तो रो लूं फाकिर
मुझे हर रोज के सदमात ने रोने ना दिया
रोने वालों से कहो उनका भी रोना रो लें
जिन्हें मजबूरी-ए-हालात ने रोने न दिया
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