rangreza...
मस्ती मुझे कुबूल जो तेरी नजर में है...
28 February 2012
ऐ साकी
भूल जाऊं मैं जमाने का गिला ऐ साकी
ला पिला और पिला और पिला ऐ साकी
बाँध कुछ ऐसा मोहब्बत की फिज़ा ऐ साकी
फिर बदल जाए ज़माने की हवा ऐ साकी
खनकते जाम का मोहताज मैं नहीं साकी
तेरी निगह सलामत मुझे कमी क्या है।
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