rangreza...
मस्ती मुझे कुबूल जो तेरी नजर में है...
25 November 2012
जंगल में फिरूं के सेहरो-सेहरा देखूं
या मादन के दस्तों दरिया देखूं
हर सूं बिखरे हंै, तेरी कुदरत के जलवे
हैरान हूं के दो आंखों से क्या-क्या देखूं
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